
US और Iran के बीच शांति वार्ता में गतिरोध के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर भी असर पड़ा है।
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों को सोमवार को बड़ा झटका लगा। शांति वार्ता में गतिरोध की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। इसका असर एशियाई और वैश्विक शेयर बाजारों पर भी दिखाई दिया।
रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से रखे गए एक प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और संघर्ष को समाप्त करने की पहल की गई थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अभी तक कोई व्यापक समझौता नहीं बन पाया है।
तेल की कीमतों में फिर तेजी
अमेरिका-ईरान वार्ता में अनिश्चितता बढ़ने का सीधा असर तेल बाजार पर पड़ा। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3 प्रतिशत तक बढ़कर 107.16 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। बाजार में निवेशकों की चिंता मुख्य रूप से मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति और समुद्री परिवहन को लेकर बनी हुई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव रहने की स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
वैश्विक शेयर बाजारों पर असर
तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता के कारण सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। रॉयटर्स के अनुसार, वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट आई, जबकि निवेशकों ने तेल की कीमतों और आगे की आर्थिक परिस्थितियों को लेकर सावधानी बरती।
बढ़ती ऊर्जा लागत का असर महंगाई, परिवहन लागत और कंपनियों के खर्च पर पड़ सकता है। इसी वजह से निवेशक मध्य पूर्व की स्थिति और अमेरिका-ईरान वार्ता से जुड़ी हर नई जानकारी पर नजर बनाए हुए हैं।
भारत पर भी पड़ा असर
अमेरिका-ईरान तनाव का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को भारतीय शेयर बाजार करीब छह महीने के निचले स्तर के आसपास पहुंच गया। तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई और बाजार में लगातार सातवें सप्ताह गिरावट का सिलसिला जारी रहा।
भारतीय रुपये पर भी दबाव देखा गया। रॉयटर्स के मुताबिक, सोमवार को रुपया करीब 95.95 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा था। तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि महंगा कच्चा तेल आयात बिल और घरेलू लागत पर असर डाल सकता है।
आगे क्या होगा?
अब बाजारों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की अगली दिशा पर है। यदि दोनों देशों के बीच किसी समझौते की दिशा में प्रगति होती है तो तेल और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता कम हो सकती है। वहीं, तनाव और बढ़ने की स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति तथा वैश्विक बाजारों पर दबाव जारी रहने की संभावना है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। दोनों पक्षों की ओर से आगे की बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत सामने आ रहे हैं, इसलिए आने वाले दिनों में स्थिति तेजी से बदल सकती है।
भारत सहित पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े अगले घटनाक्रम पर है।